Current affairs


सामान्य अध्ययन II

केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय। Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and Bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.  


# छोटे खुदरा व्यापारियों और दुकानदारों के लिए पेंशन योजना #

संदर्भ:  

लघु व्यापारियों के लिए केंद्र की पेंशन योजना- प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मान-धन, योजना 2019 को अधिसूचित किया गया है और परीक्षण के लिए लांच किया गया है।

प्रमुख विशेषताऐं:

  1. योजना के तहत सभी छोटे दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद न्यूनतम रु 3,000 मासिक पेंशन का आश्वासन दिया गया है।
  2. पात्रता: 18-40 वर्ष से कम आयु के सभी छोटे दुकानदार, स्व-नियोजित व्यक्ति और खुदरा व्यापारी, वस्तु और सेवा कर (GST) के साथ रु 1.5 करोड़ से कम का कारोबार करने वाले व्यवसायी पेंशन योजना के लिए नामांकन कर सकते हैं।
  3. पात्र होने के लिए, यह आवश्यक है कि आवेदक को राष्ट्रीय पेंशन योजना, कर्मचारी राज्य बीमा योजना और कर्मचारी भविष्य निधि के लाभार्थी न हो न ही एक आयकर दाता हो।
  4. यह योजना स्व-घोषणाओं (Self-Declaration) पर आधारित है, इसमें बैंक खाते और आधार कार्ड को छोड़कर किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है।
  5. केंद्र सरकार हर महीने अंशदान के बराबर राशि का योगदान देगी यानी ग्राहक के पेंशन खाते में सब्सिडी के बराबर राशि जमा कराएगी।

सामान्य अध्ययन II –टॉपिक 12 (गवर्नेंस)

केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन;  Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes;


# प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) #

संदर्भ :   

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत सस्ती दवाइयों की बिक्री करने वाले कुल 5440 समर्पित रिटेल आउटलेट देश में 15.07.2019 तक कार्यरत हैं।

PMBJP के बारे में :

  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है। भारत में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के माध्यम से जनता को सस्ती कीमतों पर गुणवत्ता वाली दवाइयाँ प्रदान की जायेगी|
  • प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) की स्थापना जेनेरिक दवाओं को प्रदान करने के लिए की गई है, जो कम कीमत पर उपलब्ध है लेकिन गुणवत्ता और प्रभावकारिता महंगी ब्रांडेड दवाओं के बराबर है।
  • ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (BPPI) PMBJP, की एक कार्यान्वयन एजेंसी है। BPPI (ब्यूरो ऑफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स ऑफ इंडिया) की स्थापना फार्मास्युटिकल विभाग, सरकार के तहत की गई है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • गुणवत्ता वाली दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।
  • दवाओं पर जेब खर्च को कम करने के लिए गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के कवरेज का विस्तार, ताकि प्रति व्यक्ति उपचार की लागत को फिर से परिभाषित किया जा सके।
  • शिक्षा और प्रचार के माध्यम से जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता आएगी ताकि गुणवत्ता का आशय केवल उच्च कीमत का पर्याय न बने।
  • इस कार्यक्रम में सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठन, सोसायटी, सहकारी निकाय और अन्य संस्थान शामिल हैं।

जेनेरिक दवा क्या है ?

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और रूल्स, 1945 के तहत जेनरिक या ब्रांडेड दवाओं की कोई परिभाषा नहीं है। हालांकि, जेनेरिक दवाएं आम तौर पर वे होती हैं जो बिना किसी पेटेंट के बनायी और वितरित की जाती हैं। जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसके सक्रिय घटक पर पेटेंट नहीं होता। जैनरिक दवाईयां गुणवत्ता में किसी भी प्रकार से ब्राण्डेड दवाईयों से कम नहीं होतीं तथा ये उतनी ही असरकारक है, जितनी की ब्राण्डेड दवाईयाँ। यहाँ तक कि इनकी मात्रा (डोज), साइड-इफेक्ट, सक्रिय तत्व आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के जैसे ही होते हैं। जैनरिक दवाईयों को बाजार में उतारने का लाईसेंस गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही प्राप्त होता है।

एक दवा के अनब्रांडेड जेनेरिक संस्करण की कीमत आमतौर पर एक संबंधित ब्रांडेड दवा की कीमत से कम होती है क्योंकि जेनेरिक संस्करण के मामले में, दवा कंपनी को अपने ब्रांड के प्रचार पर पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है।

उन्हें भारत में कैसे विनियमित किया जाता है?

चाहे जेनेरिक हो या ब्रांडेड, देश में निर्मित दवाईयाँ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के मानकों के अंतर्गत आती हैं और नियम, 1945 उनकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।

 


सामान्य अध्ययन II

सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.


# गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 #

संदर्भ :   

लोकसभा ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 पारित किया।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं:

विधेयक गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 में संशोधन करता है।

  • आतंकवाद की परिभाषा :

अधिनियम के तहत, केंद्र सरकार एक संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित कर सकती है यदि वह:

  1. आतंकी कृत्यों में भाग लेता है/ भाग लेती है,
  2. आतंकवाद के प्रसार के लिए लोगो को तैयार करता है,
  3. आतंकवाद को बढ़ावा देता है,
  4. अगर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है।

विधेयक इसके अतिरिक्त , सरकार को इन्ही आधारो पर आतंकवादियों के रूप में व्यक्तियों को नामित करने का अधिकार देता है।

  • एनआईए द्वारा संपत्ति जब्त करने की मंजूरी:

यदि जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक अधिकारी द्वारा की जाती है, तो एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी आतंकवाद से जुड़ी संपत्तियों की जब्ती के लिए आवश्यक होगी।

  • एनआईए द्वारा जांच:

अधिनियम के तहत, मामलों की जांच उप पुलिस अधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त रैंक के अधिकारियों द्वारा या उनसे ऊपर के रैंक के अधिकारियों द्वारा की जा सकती है। बिल मामलों की जांच के लिए एनआईए के इंस्पेक्टर या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार देता है।

  • संधियों की अनुसूची में सम्मिलन:

अधिनियम आतंकवादी अधिनियमों को निर्धारित करता है, जिसमें अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध संधियों में से किसी भी संधि के दायरे में किए गए कार्य शामिल हैं। अनुसूची में नौ संधियों को सूचीबद्ध किया गया है, जिसमें कन्वेंशन फॉर द टेररिस्ट बॉम्बिंग्स (1997), और कन्वेंशन फॉर टेकिंग ऑफ होस्टेज (1979) शामिल हैं। विधेयक सूची में एक और संधि जोड़ता है-  परमाणु आतंकवाद के अधिनियमों के दमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (2005)

पृष्ठभूमि:

यूएपीए – आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम मूल रूप से 1967 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में पारित किया गया था। इसने टाडा और 2004 में आतंकवाद निरोधक अधिनियम (POTA) को निरस्त कर दिया था। आगे 2004, 2008 और 2013 में संयुक्त प्रगतिशील कांग्रेस (UPA) सरकारों के द्वारा इसमें संशोधन किया गया।


सामान्य अध्ययन II

भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय। Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.


# शिमला समझौता #

सन्दर्भ  :

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कश्मीर पर मध्यस्थता वाले बयान पर मचे बवाल के बाद मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ‘भारत की स्थिति हमेशा से साफ रही है कि पाकिस्तान के साथ कोई भी मुद्दा द्विपक्षीय तरीके से ही सुलझाया जाएगा। ‘शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र, भारत और पाकिस्तान के बीच सभी द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने का आधार प्रदान करता है।’

शिमला समझौता 1972 :

भारत और पाकिस्तान के बीच 3 जुलाई 1972 को शिमला समझौता हुआ था। जिस पर भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे। 1971 में हुए युद्ध के बाद के हालातों में हुआ ये समझौता एक शांति समझौते से कहीं ज्यादा था।

  • इसमें दोनों देशों ने आपसी प्रतिबद्धता से यह तय किया था कि हर विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से द्विपक्षीय बातचीत के जरिए निकाला जाएगा।
  • साथ ही आपसी रिश्तों की ऐसी नींव तैयार की जाएगी, जिसमें लोगों से लोगों के संपर्कों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • इसके अलावा इस समझौते में जम्मू-कश्मीर, जो कि भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा मुद्दा है, वहां नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बरकरार रखने पर भी सहमति बनी थी।
  • दोनों देशों आपसी संघर्ष और टकराव खत्म कर आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने तथा उपमहाद्वीप में शांति की स्थापना के लिए मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं।
  • दोनों देश अपने संसाधनों और ऊर्जा का इस्तेमाल अपने लोगों की स्थिति में सुधार करने के लिए करेंगे।
  • दोनों देशों की सरकारें एक-दूसरे के खिलाफ किए जाने वाले दुष्प्रचार को रोकने के लिए अपनी ओर से हरसंभव कदम उठाएंगी। दोनों देश ऐसी सूचनाओं के प्रसार को प्रोत्साहित करेंगे, जिनसे दोनों के बीच दोस्ताना रिश्तों के विकास को बढ़ावा मिले।

 दोनों सरकारों के बीच इन बातों पर बनी थी सहमति:

  • भारत और पाकिस्तान दोनों एक-दूसरे के साथ लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सेना हटाएंगे।
  • जम्मू-कश्मीर में 17 दिसंबर 1971 के संघर्ष विराम के बाद बनी नियंत्रण रेखा का सम्मान दोनों पक्षों द्वारा बिना किसी पूर्वाग्रह के किया जाएगा।
  • आपसी मतभेदों और कानूनी व्याख्याओं के बावजूद कोई पक्ष इसे एकतरफा बदलने की कोशिश नहीं करेगा। इस रेखा के उल्लंघन के लिए बल प्रयोग या फिर एक-दूसरे को धमकी देने से दोनों पक्ष खुद को दूर रखेंगे।

# लाहौर घोषणापत्र 1999 #

फरवरी 1999 में भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच शांति और स्थिरता स्थापित करने के अलावा दोनों देशों के निवासियों की प्रगति और समृद्धि था।

घोषणापत्र के मुताबिक दोनों देश इस बात पर राजी थे कि –

  • टिकाऊ शांति और सौहार्दपूर्ण रिश्तों का विकास और मैत्रीपूर्ण सहयोग, दोनों ही देशों के लोगों के हित में होंगे। जिससे वे अपनी ऊर्जा को बेहतर भविष्य के लिए समर्पित कर सकेंगे।
  • परमाणु शक्ति संपन्न होने की वजह से यह इन दोनों की जिम्मेदारी है कि ये आपसी संघर्ष से बचने की कोशिश करेंगे। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों व शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सार्वभौमिक स्वीकृत सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • घोषणा पत्र में शिमला समझौते को लागू करने के लिए दोनों देशों के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए; वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार के उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता जताई गई थी। इलाके में सुरक्षा के माहौल में सुधार के लिए विश्वास निर्माण के उपायों के महत्व को पारस्परिक रूप से समझने पर सहमति बनी थी।
  • इसके साथ ही 23 सितंबर, 1998 के समझौते को याद करते हुए दोनों इस बात पर भी एकमत थे कि शांति और सुरक्षा का वातावरण दोनों पक्षों के सर्वोच्च राष्ट्रीय हित में है और जम्मू और कश्मीर समेत अन्य मुद्दों का भी समाधान इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है।

 दोनों सरकारों के बीच इन बातों पर बनी थी सहमति:

  • जम्मू-कश्मीर के मुद्दे समेत सभी मुद्दों को हल करने के अपने प्रयासों को तेज किया जायेगा।
  • एक-दूसरे के आंतरिक मामलो में हस्तक्षेप और छेड़छाड़ करने से बचेंगे।
  • सहमति वाले सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर जल्दी और सकारात्मक परिणाम के लिए अपनी समग्र और एकीकृत संवाद प्रक्रिया को तेज करेंगे।
  • परमाणु हथियारों के अनाधिकृत इस्तेमाल या उससे जुड़ी किसी दुर्घटना की जोखिम को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाएंगे, साथ ही परमाणु समेत अन्य पारंपरिक क्षेत्रों में विश्वास निर्माण और संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से विस्तृत उपायों के साथ अवधारणाओं और सिद्धांतों पर चर्चा करेंगे।
  • दक्षेस के लक्ष्यों और उद्देश्यों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता की दोबारा पुष्टि करने और साल 2000 के लिए सार्क के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने और दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास के जरिए उनके जीवन स्तर में त्वरित सुधार करने के लिए लगातार प्रयत्नशील रहेंगे।
  • हर रूप में आतंकवाद की निंदा और इस खतरे का मुकाबला करने के लिए हमेशा दृढ़ संकल्पित रहेंगे।

निष्कर्ष :

भारत में शिमला समझौते के आलोचकों ने कहा कि यह समझौता तो एक प्रकार से पाकिस्तान के सामने भारत का समर्पण था क्योंकि भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान के जिन प्रदेशों पर अधिकार किया था, उन्हें छोड़ना पड़ा। परंतु शिमला समझौते का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि दोनों देशों ने अपने विवादों को आपसी बातचीत से निपटाने का निर्णय लिया। इसका यह अर्थ हुआ कि कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय रूप न देकर, अन्य विवादों की तरह आपसी बातचीत से सुलझाया जाएगा।